कैसे होता है बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन

ज़्यादातर 12वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को यह नहीं पता होता कि बोर्ड एग्ज़ाम की उत्तर पुस्तिकाएं चेक होने की क्या प्रक्रिया होती होती है. इस जानकारी के अभाव में कुछ विद्यार्थी रिजल्ट आने के बाद अक्सर यह कहते मिल जाते हैं कि बोर्ड रिजल्ट में जितने स्कोर की उन्होंने उम्मीद की थी उससे ज़्यादा मार्क्स आये या कम मार्क्स आये. कुछ विद्यार्थी यह भी शिकायत करते मिल जाते हैं कि उन्होंने सब सही किया फिर भी उनके नंबर कम आये.

आज इस आर्टिकल द्वारा हम जानेंगे कि आखिर बोर्ड एग्जाम में कॉपी किस तरह से चेक होती है और हम ऐसा क्या करें जिससे हमारे ज़्यादा से ज़्यादा मार्क्स आए.

कैसे होता है बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन

एग्ज़ाम की उत्तर पुस्कतिकाएँ चेक करने के लिए बोर्ड देश भर के केंद्रों में भेजता है और विभिन्न स्कूलों से अनुभवीं शिक्षकों की नियुक्तियां करता है . हर शिक्षक को प्रति कॉपी के हिसाब से रूपया दिया जाता है.

बोर्ड एग्ज़ाम खत्म होने के बाद सभी उत्तर पुस्तिका एकत्रित की जाती हैं और उन्हें विभिन्न केंद्रों (बोर्ड द्वारा चयनित) में चेकिंग के लिए भेजा जाता.

भेजने से उत्तर पुस्तिकाओ से नाम और रोल नंबर वाला पेज हटा दिया जाता है और उसकी जगह एक गुप्त कोड लिख दिया जाता है जिसका पता सिर्फ बोर्ड के स्टाफ को होता है. इस प्रक्रिया द्वारा बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि कॉपी चेक होने के दौरान कोई बेईमानी न हो.
उत्तर पुस्तिकाओ के मूल्यांकन करने वाले हर शिक्षक को एक मार्किंग स्कीम दी जाती है
उत्तर पुस्तिकाओ के मूल्यांकन करने वाले हर शिक्षक को एक मार्किंग स्कीम दी जाती है l इस मार्किंग स्कीम में हर एक प्रश्न के उत्तर के लिए उत्तर संकेत या मूल्य बिंदु (Answer Key or Value Points) मौज़ूद होते है l उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान जिस उत्तर में ये सारे उत्तर संकेत या मूल्य बिंदु मौज़ूद होते है उस उत्तर को शिक्षक पूरे नंबर देता है l
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उत्तर में हर एक स्टेप के होते हैं मार्क्स
CBSE जैसे बोर्ड में हर उत्तर की स्टेप मार्किंग होती है l पूरे नंबर पाने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है कि आपने उत्तर में सभी ज़रूरी स्टेप दिए हो और कोई भी महत्वपूर्ण स्टेप आपसे मिस न हुआ हो l
जिस उत्तर में उत्तर संकेत या मूल्य बिंदु (Answer Key या Value Points) का कुछ हिस्सा नहीं होता है तो शिक्षक उस उत्तर में पूरे नंबर नहीं देता भले ही वो सही हो l
उत्तर किस तरह दर्शाया गया हैयह भी है महत्वपूर्ण  
अगर CBSE 12वीं के बोर्ड एग्ज़ाम की बात करें तो करीब 10 लाख विद्यार्थी 12वीं के बोर्ड एग्ज़ाम देते हैं l इसका मतलब बोर्ड के पास दो महीनों से भी कम का समय होता है पूरा प्रोसेस ख़त्म करने के लिए l कॉपी चेक करने वाले शिक्षक को भी प्रति कॉपी चेक करने के हिसाब से रूपया मिलता है l
इसका मतलब इस पूरी प्रोसेस में समय बहुत कम होता है और साथ-साथ कुछ शिक्षक ज़्यादा से ज़्यादा पैसा भी कमाना चाहते हैं l
इसलिए जो विद्यार्थी सही उत्तर शीर्षक, उपशीर्षक बुलेट पॉइंट्स, डायग्राम इत्यादि का इस्तेमाल करके उत्तर लिखते हैं तो उनको पूरे नंबर मिलने की संभावना बढ़ जाती है l
अगर उत्तर में बड़े-बड़े पैराग्राफ होंगे तो शिक्षक को जानकारी ढूढ़ कर निकालनी होगी l इस चक्कर में हो सकता है कि उत्तर में कुछ महत्वूर्ण बिंदु शिक्षक को न मिल पाएं l यह भी हो सकता है कि शिक्षक पूरे नंबर देने की जगह जल्दबाज़ी में औसत नंबर दे l उत्तर किस तरह दर्शाया गया है, यह भी है बहुत महत्वपूर्ण है l
ज़्यादा शब्दों का मतलब ज़्यादा नंबर बिल्कुल नहीं है
कुछ विद्यार्थियों को यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी होती है कि हर एक प्रश्न के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लिखो तो पूरे नंबर ज़रूर मिलेंगेl ज़्यादा से ज़्यादा लिखने के चक्कर में ऐसे विद्यार्थियों अक्सर पूरा पेपर हल नहीं कर पाते l
ज़्यादा से ज़्यादा लिखने का कोई फ़ायदा नहीं है l आपको किसी भी उत्तर में पूरे नंबर तभी मिलेंगे जब आपने उस उत्तर के द्वारा कम से कम शब्दों में सही एवं सटीक जानकारी दी होगी l
 अगर आपसे AC Generator का प्रिंसिपल पूछा गया है और यह प्रश्न एक नंबर का है तो आपको सिर्फ और सिर्फ AC Generator का प्रिंसिपल ही लिखना होगा इसके आलावा अगर आप कुछ भी लिख रहें हैं तो आप सिर्फ समय की बर्बादी कर रहे हैं l
सारांश:
अभी तक आपने जाना कि बोर्ड एग्ज़ाम में कॉपी कैसे चेक होती है और कॉपी चेकिंग के दौरान मार्किंग स्कीम कितनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है l अगर आपको जानना है कि काम शब्दों में ज़्यादा से ज़्यादा बेहतर उत्तर कैसे लिखें तो CBSE द्वारा प्रकाशित की गई Marking Scheme देख सकते हैं l सीबीएसई हर साल बोर्ड एग्जाम का रिजल्ट घोषित होने के बाद जो मार्किंग स्कीम बोर्ड कॉपी चेक करने के लिए इस्तेमाल होती हैं उन्हें सार्वजनिक कर देता है l

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